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आर्थराइटिस

आर्थराइटिस दुनिया की उन बीमारियों में से एक है जो दुनिया में बहुत संख्या में लोगों को प्रभावित करती है। आर्थराइटिस प्रत्येक वर्ष दुनिया के करोड़ों लोगों  को अपना शिकार बनाती है, अकेले भारत में ही हर साल इसके एक करोड़ से अधिक मामले सामने आते है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक आकलन के अनुसार भारत में 18 करोड़ से अधिक लोग आर्थराइटिस की समस्या से पीड़ित है। 18 से 64 वर्ष के आयु वाले व्यक्तियों में हर तीन में से एक व्यक्ति को आर्थराइटिस की समस्या है। आर्थराइटिस किसी इंसान को अपाहिज या लाचार सा बना देती है। आर्थराइटिस की समस्या बढ़ती उम्र के साथ अधिक देखने को मिलती है। आर्थराइटिस की समस्या अकसर वृद्ध, उम्रदराज लोगों  में देखी जाती है, जिस कारण उनको चलने फिरने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है।

आर्थराइटिस क्या है?

आर्थराइटिस एक गंभीर बीमारी है जो मनुष्य की तंत्रिका तंत्र को सीधा प्रभावित करती है, आर्थराइटिस से पीड़ित व्यक्ति को चलने-फिरने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। आर्थराइटिस मनुष्य को काफी असहनीय पीड़ाये देता है और यह व्यक्ति की बढ़ती उम्र के साथ-साथ बढ़ता जाता है। आर्थराइटिस व्यक्ति के कई अंगों को प्रभावित करता है, जिनमे घुटना, पुट्ठे के जॉइंट, पाँव, कंधों और रीढ़ की हड्डी आदि प्रमुख है। आर्थराइटिस शरीर में जलन, सूजन और हड्डियों के जोड़ो के बीच घर्षण को बढ़ा देता है। जोड़ो में यह बदलाव चलने-फिरने में काफी दर्द देते है।

 

आर्थराइटिस के प्रकार-

आर्थराइटिस मुख्यतः 5 प्रकार की होती है-

  1. ऑस्टिओआर्थरिटिस
  2. रहूमटॉइड आर्थराइटिस 
  3. पसरीअतिक आर्थराइटिस
  4. गाउट
  5. लुपस 

 

आर्थराइटिस के क्या लक्षण है?

आर्थराइटिस के लक्षण उसके अलग-अलग प्रकारों में अलग-अलग होते है, लेकिन कुछ मुख्य लक्षण है जो नीचे लिखे हुए है-

  • घुटनो में असहनीय दर्द
  • पाँव और पुट्ठे के जोड़ो में दर्द
  • शरीर में कठोरता
  • जिस स्थान में तकलीफ हो व कठोर हो जाना
  • ग्रसित स्थान में सूजन
  • दर्द वाले हिस्से में लाल पड़ना
  • चलने में समस्या

 

आर्थराइटिस होने के क्या कारण है?

  • ओबेसिटी और मोटापा
  • कमजोर पेशिया
  • चोटों का लगना
  • पुरानी गुमचोट का होना
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना
  • अनुवांशिक या पारिवारिक इतिहास
  • बढ़ती हुई उम्र
  • इन्फेक्शन

आर्थराइटिस से क्या समस्ये हो सकती है?

  • हृदय की समस्याएं
  • फेफड़ो में दिक्कत
  • चलने फिरने में तकलीफ होना
  • जोड़ो का हमेशा के लिए बेकार हो जाना
  • त्वचा और आँखों में समस्या
  • थकावट और बुखार के समस्या
  • रक्त नाल में समस्या

 

क्या करें और क्या न करें जब आर्थराइटिस हो?

  • अपनी चोटों को अच्छी तरह ठीक करें
  • अपने इम्यून को मजबूत रखे
  • तला-भुना और पैकेज्ड फ़ूड को बंद करें
  • अपने जोड़ो को क्रियाशील रखे
  • शरीर में खिचाव होना चाहिए
  • व्यायाम और योग शरीर को लचीला और स्वस्थ रकने में मदद करते है
  • नमक का सेवन ज्यादा न करें
  • लाल मास का सेवन न करें
  • ओलिव तेल का इस्तेमाल करें
  • दालचीनी के तेल से दर्द वाले स्थान को मले

 

आर्थराइटिस के लिए होम रेमेडीज-

सामग्री:

  1. 20 से 25 नीम के पत्ते
  2. 2 चम्मच पपीता के बीज
  3. 2 कप पानी
  4. एक चम्मच निम्बू का रस

 

स्टेप 1:  नीम के पत्तो को अच्छी तरह कूटकर रख ले

स्टेप 2: पानी को 5 मिनट तक गर्म करें

स्टेप 3:  5 मिनट अकेले गर्म करने के बाद उसमे पपीता के बीज और कुटे हुए नीम के पत्तो को डाले और गर्म करें

स्टेप 4:  जब पानी अपनी पहले की मात्रा से आधा हो जाये तो उसे गर्म करना बंद कर दे

स्टेप 5:  पानी को छान कर उसमें निम्बू के रस को मिला ले   

 

निर्देश: इस मिश्रण को एक कप में ले और आधा कप सुबह और बाकि का आधा कप शाम को रोजाना खाली पेट एक या दो महीने तक पिए।

 

आर्थराइटिस में क्या खाये?

  • अदरक व काली मिर्च जिनमें हो वह खाना व चाय इत्यादि का सेवन करें
  • दो चम्मच एप्पल साइडर विनेगर जूस में मिलाकर पिए
  • जिस भोजन में अजवाइन या मेथी हो उनका सेवन करें
  • हल्दी दूध का रोजाना सेवन भी आर्थराइटिस में मदद करता है
  • अश्वगंधा और गिलोय का जूस रोजाना पिए

 

आर्थराइटिस के लिए 5 टिप्स-

  • जहां आर्थराइटिस हो या होने की सम्भावना हो उस स्थान को दालचीनी के तेल से मालिश करें
  • यदि आर्थराइटिस अपने शुरुआती दौर में है तो बर्फ से उस स्थान की सिंकाई करें
  • आर्थराइटिस यदि पुरानी है तो उसमें गर्म सिंकाई करें
  • योग व व्यायाम रोजाना करें
  • पैकेज्ड फ़ूड का सेवन बंद करें और सात्विक आहार ग्रहण करें

 

 

 

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